तिथि: 10 जुलाई 2026, शुक्रवार
“यह दान पूर्णतः स्वेच्छा से किया जाता है और non-refundable है।”
योगिनी एकादशी हिंदू धर्म की 24 एकादशियों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। पद्म पुराण में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत मन, वचन और कर्म की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है तथा मोक्ष की प्राप्ति का भी साधन माना जाता है।
🌸 योगिनी एकादशी का महत्व 🌸
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कुबेर के पुष्प माली हेममाली ने अपने कर्तव्य की उपेक्षा की, जिससे महर्षि के शाप के कारण उसे कुष्ठ रोग हो गया। बाद में महर्षि मार्कण्डेय के निर्देश पर उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उसका रोग दूर हो गया और उसे पुनः सम्मान एवं सुख प्राप्त हुआ। इसी कारण इस एकादशी को रोग, दुःख और पापों का नाश करने वाली एकादशी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का पुण्य 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना गया है। यह व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
🙏 पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें तथा तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। दिनभर सात्त्विक भाव रखें, क्रोध और असत्य से दूर रहें तथा विष्णु सहस्रनाम, गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करें।
🌼 योगिनी एकादशी के लाभ 🌼
भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
समस्त पापों का नाश होता है।
रोग, दुःख और दरिद्रता दूर होती है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक उन्नति एवं मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
जीवन में सफलता और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और भगवान विष्णु की भक्ति का महान अवसर है। इस दिन किए गए जप, तप, दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है। यदि हम इस पावन अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता, गौ सेवा, अन्नदान और धार्मिक कार्यों में सहयोग करते हैं तो उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
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हर दान सेवा, हर सेवा पुण्य।
सेवा ही सच्ची भक्ति है।
|| श्रीहरि विष्णु की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। || 🙏
“Gauri Gopal Trust को दिया गया प्रत्येक दान स्वेच्छा से किया जाता है। यह राशि सेवा कार्यों में उपयोग होती है, अतः एक बार किया गया दान non-refundable होता है।”
