🌺 गायत्री जयंती एवं निर्जला एकादशी 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि, व्रत नियम और दान का महत्व

“यह दान पूर्णतः स्वेच्छा से किया जाता है और non-refundable है।”

गायत्री जयंती 2026 और निर्जला एकादशी 2026 की पवित्र तस्वीर

तिथि: 25 जून 2026, गुरुवार पर्व: गायत्री जयंती एवं निर्जला एकादशी

सनातन धर्म में गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी दोनों का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में 25 जून, गुरुवार को यह शुभ संयोग बन रहा है। यह दिन आध्यात्मिक साधना, तप, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। एक ओर इस दिन वेदमाता गायत्री की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु को समर्पित निर्जला एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-पाठ, जप, तप तथा दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं।

🌺 गायत्री जयंती का महत्व

गायत्री माता को वेदों की जननी और ज्ञान की देवी कहा जाता है। गायत्री मंत्र को हिंदू धर्म का सबसे पवित्र मंत्र माना गया है। मान्यता है कि गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने से मन की शुद्धि, बुद्धि का विकास और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
गायत्री जयंती के दिन श्रद्धालु माता गायत्री की विशेष पूजा करते हैं, हवन करते हैं और गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। यह दिन आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का उत्तम अवसर माना जाता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से गायत्री माता की उपासना करता है, उसके जीवन में ज्ञान, विवेक और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

🙏 निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है। पद्म पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्षभर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त कर सकता है।
इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और यथासंभव निर्जल रहकर व्रत का पालन करते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

🪔 पूजा विधि

प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
माता गायत्री और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ करें।
दिनभर सात्विक आचरण रखें और भगवान का स्मरण करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें।

🎁 इस दिन क्या दान करें?

निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन निम्न वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है—


✅ जल से भरा कलश
✅ पंखा
✅ छाता
✅ वस्त्र
✅ फल और अन्न
✅ गौसेवा हेतु सहयोग
✅ जरूरतमंदों को भोजन


दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है तथा भगवान विष्णु और माता गायत्री की कृपा प्राप्त होती है।

❤️ सेवा और दान का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि पूजा के साथ सेवा और दान भी आवश्यक है। गायत्री जयंती एवं निर्जला एकादशी के अवसर पर गौसेवा, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।


गौरी गोपाल ट्रस्ट गौसेवा, अन्नदान, धार्मिक और सामाजिक सेवा कार्यों के माध्यम से समाज की सेवा में निरंतर समर्पित है। आपके सहयोग से अनेक जरूरतमंद लोगों, गौमाता और धार्मिक कार्यों को सहायता मिलती है।

🤝 सहयोग हेतु विनम्र निवेदन

“गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी के इस पावन अवसर पर सेवा और दान के माध्यम से पुण्य अर्जित करें।”


🔸 गौसेवा करें
🔸 अन्नदान करें
🔸 जरूरतमंदों की सहायता करें
🔸 धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में सहयोग करें


“दान से धन कम नहीं होता, बल्कि ईश्वर की कृपा और पुण्य में वृद्धि होती है।”


|| ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् || 🙏🌺🕉️

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आपका छोटा सा सहयोग भी सेवा कार्यों में सहायक बनेगा।

“Gauri Gopal Trust को दिया गया प्रत्येक दान स्वेच्छा से किया जाता है। यह राशि सेवा कार्यों में उपयोग होती है, अतः एक बार किया गया दान non-refundable होता है।”