“यह दान पूर्णतः स्वेच्छा से किया जाता है और non-refundable है।”
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार विभुवन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत 3 जून 2026, बुधवार को रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव कहा जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।
🙏 विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकटों का नाश करने वाली चतुर्थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जो भक्त नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं तथा उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से बुद्धि, विवेक, ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा नौकरी करने वाले लोगों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
🪔 विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
घी का दीपक और धूप जलाएं।
भगवान गणेश को लाल पुष्प, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
गणेश चालीसा एवं गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
दिनभर व्रत रखें और सात्विक आचरण का पालन करें।
रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद भगवान गणेश को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण करें।
📖 विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी दुखों और संकटों का नाश करते हैं। एक समय एक राजा अनेक कठिनाइयों से घिर गया। उसने ऋषियों के कहने पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया और भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा की।
भगवान गणेश की कृपा से राजा के जीवन की सभी परेशानियाँ समाप्त हो गईं और उसके राज्य में सुख-समृद्धि का आगमन हुआ। तभी से संकष्टी चतुर्थी का व्रत संकटों को दूर करने वाला और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है।
🌙 चंद्र दर्शन का महत्व
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की पूजा पूर्ण करने से व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। इसलिए भक्त पूरे दिन उपवास रखकर रात्रि में चंद्रमा के दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं।
🌿 दान और सेवा का महत्व
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
Gauri Gopal Trust भी इस पावन अवसर पर सेवा, दान और मानवता के कार्यों में सहयोग करने का संदेश देता है। जरूरतमंदों की सहायता करना भगवान गणेश को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ माध्यम माना गया है।
✨ व्रत के लाभ
जीवन के संकट और बाधाएँ दूर होती हैं।
भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
परिवार में सुख और शांति बनी रहती है।
व्यापार और नौकरी में सफलता मिलती है।
मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
मानसिक तनाव कम होता है।
ज्ञान, बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है।
🌟 निष्कर्ष
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 भगवान गणेश की आराधना और संकटों से मुक्ति प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक व्रत करने से जीवन में सुख, शांति, सफलता और समृद्धि का आगमन होता है। भगवान गणेश सभी भक्तों के जीवन से विघ्नों का नाश करें और उन पर अपनी कृपा बनाए रखें।
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ 🙏
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आपका छोटा सा सहयोग भी सेवा कार्यों में सहायक बनेगा।
“Gauri Gopal Trust को दिया गया प्रत्येक दान स्वेच्छा से किया जाता है। यह राशि सेवा कार्यों में उपयोग होती है, अतः एक बार किया गया दान non-refundable होता है।”
