🌕 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 चंद्रमा पूजा और भगवान विष्णु

“यह दान पूर्णतः स्वेच्छा से किया जाता है और non-refundable है।”

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का पावन पर्व 31 मई 2026, रविवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है, इसलिए इसे आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ, दान और स्नान के लिए विशेष फलदायी माना गया है।
अधिक मास में आने वाली यह पूर्णिमा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, चंद्र देव तथा माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

🙏 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

पूर्णिमा तिथि को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से मन को शांति प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु का पूजन, दान-पुण्य तथा सत्संग का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

🪔 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा विधि

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।
पुष्प, फल और तुलसी अर्पित करें।
विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें।
चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें।
जरूरतमंदों को दान दें।

🌿 स्नान और दान का महत्व

पूर्णिमा के दिन स्नान और दान को अत्यंत शुभ माना गया है। इस अवसर पर अन्न, वस्त्र, जल, फल तथा धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि पूर्णिमा के दिन किया गया दान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लेकर आता है।

✨ पूर्णिमा व्रत के लाभ

मानसिक शांति प्राप्त होती है।
परिवार में सुख और समृद्धि आती है।
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक उन्नति होती है।
नकारात्मकता दूर होती है।
पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

❤️ सेवा और मानवता का संदेश

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा हमें दान, सेवा और मानवता का संदेश देती है। इस पावन अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, गौ सेवा करना तथा धार्मिक कार्यों में सहयोग देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Gauri Gopal Trust आप सभी से निवेदन करता है कि इस शुभ अवसर पर सेवा और दान के कार्यों में भाग लें तथा समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।

🌟 निष्कर्ष

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 श्रद्धा, भक्ति और पुण्य का पावन पर्व है। इस दिन पूजा, जप, दान और सेवा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे।
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥ 🙏

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आपका छोटा सा सहयोग भी सेवा कार्यों में सहायक बनेगा।

“Gauri Gopal Trust को दिया गया प्रत्येक दान स्वेच्छा से किया जाता है। यह राशि सेवा कार्यों में उपयोग होती है, अतः एक बार किया गया दान non-refundable होता है।”