Mokshada Ekadashi 2025
⭐ Mokshada Ekadashi 2025 – पापों का नाश और मोक्ष प्रदान करने वाली पवित्र एकादशी (2025 Special Article)
सनातन धर्म में वर्ष भर अनेक व्रत-उपवास और तिथियाँ आती हैं, परन्तु कुछ तिथियाँ अत्यंत विशेष मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक है — मोक्षदा एकादशी।
यह एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि मोक्ष, पुण्य और पूर्वजों की मुक्ति प्रदान करने वाली तिथि है।
मोक्षदा एकादशी वैष्णव भक्तों के साथ-साथ उन सभी लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है जो अपने जीवन में आध्यात्मिक मार्ग अपनाना चाहते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत करने से सैकड़ों जन्मों के पाप मिट जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
इस विस्तृत लेख में हम समझेंगे—
- मोक्षदा एकादशी क्या है?
- यह कब आती है?
- इसका महत्व क्यों अत्यधिक बताया गया है?
- व्रत की विधि, नियम और पूजा-पद्धति
- भगवान श्रीकृष्ण ने इस तिथि को क्यों श्रेष्ठ बताया?
- मोक्षदा एकादशी की कथा
- किन लोगों को यह व्रत अवश्य करना चाहिए
- मोक्ष प्राप्ति और पितृ उद्धार से इसका संबंध
यह लेख पूरी तरह सरल, भावनात्मक और आध्यात्मिक भाषा में लिखा गया है ताकि हर भक्त इसे सहजता से समझ सके।
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🌿 मोक्षदा एकादशी क्या है?
धर्मशास्त्रों में एकादशी को “जयन्ती तिथि” कहा गया है —
क्योंकि इस दिन मानव के भीतर सोई हुई चेतना जागती है।
मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है।
इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
इसी कारण इस एकादशी को गीता जयंती भी कहा जाता है।
अर्थात यह तिथि:
- ज्ञान
- भक्ति
- मोक्ष
- और धर्म की स्थापना
का संदेश देती है।
🌿 मोक्षदा एकादशी का महत्व इतना अधिक क्यों है?
⭐ 1. मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी
शास्त्रों में कहा गया है कि इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।
यही कारण है कि इसे “मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि” कहा गया है।
⭐ 2. पितृ उद्धार
इस दिन व्रत करने से न केवल साधक को लाभ मिलता है,
बल्कि उसके पूर्वजों को भी मोक्ष प्राप्त होता है।
कई पंडित इसे “पितृ मोक्ष दिवस” भी कहते हैं।
⭐ 3. सभी पाप नष्ट होते हैं
इस व्रत को करने से अनजाने में किए गए पाप,
और पिछले जन्मों के दोष भी समाप्त हो जाते हैं।
⭐ 4. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि
जो व्यक्ति इस एकादशी को पूरे नियम से करता है,
उसके घर में—
- सुख
- शांति
- संतोष
- और सकारात्मक ऊर्जा
लगातार बनी रहती है।
⭐ 5. भागवत और गीता के उपदेश का प्रभाव
चूँकि इस दिन गीता का उद्भव हुआ था,
इसलिए इस दिन गीता-पाठ का फल अनेक गुना मिलता है।
🌿 मोक्षदा एकादशी की कथा
धर्मशास्त्रों में एक सुंदर कथा मिलती है।
वैकुंठ में भगवान विष्णु के समीप नारद जी पूछते हैं—
“भगवान, मोक्षदा एकादशी व्रत का फल क्या है?”
तब भगवान बताते हैं:
प्राचीन समय में वैखानस नाम के एक राजा थे — राजा वैखानस।
वे धर्मात्मा, दयालु और प्रजा के हितैषी थे।
एक रात उन्होंने स्वप्न में देखा कि उनका पिता नरक जैसी जगह में अत्यंत पीड़ा झेल रहा है।
राजा चिंतित और दुखी हो गए।
उन्होंने अनेक ऋषियों से समाधान पूछा।
सबने कहा कि मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी का व्रत करो।
यह व्रत पितरों को मोक्ष प्रदान करता है।
राजा ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया।
जब उन्होंने व्रत का फल अपने पिता को समर्पित किया,
तुरंत उनके पिता के पाप नष्ट हो गए और उन्हें दिव्य रूप मिला।
राजा ने आश्चर्य से देखा कि उनके पिता प्रकाशित स्वरूप में आकाश की ओर जा रहे हैं।
इसलिए कहा गया है—
“मोक्षदा एकादशी व्रत पितृ मोक्ष और आत्मा की शुद्धि के लिए सर्वोत्तम तिथि है।”
🌿 मोक्षदा एकादशी व्रत विधि (Step-by-Step)
⭐ सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
⭐ भगवान विष्णु, विशेषकर श्रीकृष्ण की पूजा करें
क्योंकि गीता जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है।
⭐ तुलसी दल अर्पित करें
विष्णु भगवान को तुलसी अत्यंत प्रिय है।
⭐ दीप जलाएँ और ध्यान करें
एकादशी का सबसे बड़ा लाभ ध्यान से प्राप्त होता है।
⭐ गीता का पाठ या कम से कम एक अध्याय पढ़ें
ध्यानपूर्वक गीता के श्लोक पढ़ने से आंतरिक शांति प्राप्त होती है।
⭐ उपवास रखें
फलाहार या निर्जला उपवास किया जा सकता है।
⭐ रात में जागरण
यदि संभव हो तो भजन-कीर्तन करें।
⭐ द्वादशी के दिन भोज कराना
द्वादशी के दिन ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
🌿 व्रत के नियम (What Not To Do)
- तामसिक भोजन वर्जित है
- क्रोध न करें
- किसी का अपमान न करें
- शराब, मांस आदि से दूर रहें
- झूठ न बोलें
- अनावश्यक विवाद से बचें
🌿 मोक्षदा एकादशी पर क्या विशेष करें?
✔ गीता पाठ
यह दिन विशेष रूप से गीता समर्पण का है।
✔ श्रीकृष्ण का ध्यान
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
इस मंत्र का जप अत्यंत फलदायी है।
✔ दान देना
गौ सेवा, वृद्ध सेवा, गरीबों को भोजन —
इन सबका एकादशी पर कई गुना फल मिलता है।
✔ भजन-कीर्तन
आश्रमों और मंदिरों में भक्ति-भावना से कीर्तन होता है।
🌿 मोक्षदा एकादशी किसे करनी चाहिए?
- जो अपने पितरों की शांति चाहते हैं
- जो आध्यात्मिक मार्ग पर हैं
- जिन पर कठिन समय चल रहा है
- जिनका मन अशांत रहता है
- जो मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं
यह एकादशी हर आयु के व्यक्ति कर सकता है।
⭐ मोक्षदा एकादशी और मन की शांति का गहरा संबंध
आज की तेज़ गति वाली जिंदगी में
मन का स्थिर होना सबसे बड़ी चुनौती है।
मोक्षदा एकादशी का उपवास
मन को—
- शांत
- स्थिर
- सात्त्विक
- शुद्ध
बनाता है।
इस दिन ध्यान करने से “अंतर की रोशनी” जागती है।
⭐ निष्कर्ष – मोक्ष का मार्ग सरल है, बस श्रद्धा चाहिए
मोक्षदा एकादशी कोई सामान्य तिथि नहीं,
यह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।
इस एकादशी पर सच्ची भावना से व्रत करने वाला व्यक्ति—
अपने जीवन से नकारात्मकता मिटा देता है
और मोक्ष की दिशा में कदम बढ़ा देता है।
यह तिथि हमें बताती है कि—
“मनुष्य का जन्म दुर्लभ है,
और इस जन्म को सार्थक करने का श्रेष्ठ माध्यम— भक्ति और व्रत है।”
आप सभी को मोक्षदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय श्रीकृष्ण।
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